प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर ने आकार लेना शुरू कर दिया है। कॉरिडोर में बनने वाले दर्शनार्थी सुविधा केंद्र की पहली झलक बेहद खूबसूरत है। करीब 750 करोड़ की लागत से बन रहे काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के पांच लाख वर्ग फीट के एरिया में कल्चरल सेंटर, वैदिक केंद्र, टूरिस्ट फेसिलिटेशन सेंटर, सिटी म्यूजियम, जप-तप भवन, भोगशाला, मोक्ष भवन और दर्शनार्थी सुविधा केंद्र बनाया जाना है।
काशी विश्वनाथ मंदिर से मणिकर्णिका और ललिता घाट के बीच एक किलोमीटर लंबे और 70 फीट चौड़े, पांच लाख वर्ग फिट के कॉरिडोर ने पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। कॉरिडोर के लिए 200 से अधिक भवनों व मंदिरों को अधिग्रहण पर 300 करोड़ रु. खर्च किए गए हैं। वहीं कॉरिडोर पर 339 करोड़ रु. खर्च हो रहे हैं। इसमें रूद्राक्ष सहित धार्मिक महत्व के पेड़ पौधे लगेंगे।
(विजय उपाध्याय) अयोध्या में आधुनिकता के नए प्रयोग के साथ सहिष्णुता का रंग पक्का हो रहा है। सरयू किनारे लक्ष्मण किले में भव्य सेट और लाइटिंग के बीच रामलीला का मंचन हो रहा है। इसके रोमांच को बॉलीवुड के कलाकारों ने और बढ़ा दिया है। दिल्ली और मुंबई सेे आया 120 लोगों का दल मंचन कर रहा है। इसमें 85 आर्टिस्ट अलग-अलग किरदार निभा रहे हैं।
इसे दूरदर्शन और सोशल मीडिया के जरिए हर रोज 5 करोड़ से ज्यादा लोग देख रहे हैं। रावण की भूमिका निभा रहे शहबाज खान भगवान शंकर के शिवतांडव स्तोत्र का गायन कर रहे हैं। शहबाज बताते हैं- ‘रामलीला, राम और रावण से जुड़ी घटनाओं का प्रवाह है।’ तैयारियों पर कहते हैं- ‘सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हमें तीन घंटे लाइव प्रस्तुति देनी है। वो भी एक भी रीटेक लिए बिना।
इसलिए अगस्त से ही तैयारी शुरू कर दी थी। अभी भी हर दिन दो से तीन घंटे संवादों को याद करते हैं। प्रस्तुति से ठीक पहले मंच पर रिहर्सल करते हैं। रामलीला में अंगद बने भाजपा सांसद रवि किशन बताते हैं- ‘अयोध्या की रामलीला में पूरा भारत समाया है। नारद बने असरानी सिंध से और हनुमान बने बिंदु दारा सिंह पंजाब से आते हैं।’
सीता का किरदार निभा रहीं टीवी कलाकार कविता जोशी बताती हैं- ‘सीता के अवतार में आने के लिए हर दिन दो से ढाई घंटे तक मेकअप में लगते हैं। हम दिन-रात संवादों को जीते हैं।’ कलाकारों के मेकअप के लिए 12 आर्टिस्ट काम कर रहे हैं।
दूरदर्शन के महानिदेशक मनोज अग्रवाल बताते हैं कि दूरदर्शन के सबसे बेहतर कैमरा क्रू और टेक्नीशियन अयोध्या भेजे गए हैं। 9 एचडी कैमरे अलग-अलग एंगल से मंच को कवर करते हैं और एचडी वैन में बने कंट्रोल रूम से लाइव प्रसारण हो रहा है।
अयोध्या के लोग रामलीला को टीवी पर देखकर खुश हैं। हनुमान मंदिर के पुजारी संतोष वैदिक कहते हैं- ‘यहां रामलीला सीमित हो गई थी। लेकिन, नई रामलीला से माहौल बदल रहा है।’ होटल व्यवसायी अनूप बताते हैं कि उनके पास इस रामलीला को सामने से देखने के लिए जमकर पूछताछ आ रही है। उम्मीद है अगले साल मंच के सामने बैठकर देखने का मौका मिलेगा।
रावण दहन के लिए पीएम मोदी को आने का निमंत्रण
पहली बार रामलीला का लाइव प्रसारण दूरदर्शन पर हो रहा है। रामलीला का समापन 25 अक्टूबर को रावण दहन से किया जाएगा। दहन के लिए लगभग 100 फुट ऊंचा रावण का इकोफ्रेंडली पुतला बनवाया जा रहा है। ताकि प्रदूषण कम से कम हो। यह 23 को अयोध्या पहुंचेगा।
शो के आयोजक बॉबी मलिक ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अयोध्या आकर रावण दहन करने का आग्रह किया है। इससे लोगों में उत्साह का संचार होगा। हालांकि, उन्हें प्रधानमंत्री ऑफिस की तरफ से कंफर्मेशन नहीं मिली है।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सोमवार को हाथरस घटना में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार बिना परिवार की मर्जी के कराए जाने के मामले में हुई सुनवाई का आदेश मंगलवार को देर शाम को आ गया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि हाथरस के एसपी को निलम्बित किया गया तो डीएम को वहां बनाए क्यों रखा गया है। न्यायालय ने कहा कि हम राज्य सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह इस सम्बंध में एक निष्पक्ष निर्णय लेगी।
हालांकि न्यायालय द्वारा डीएम को निलम्बित न किये जाने का कारण पूछे जाने पर अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश अवस्थी कोई संतोषजनक जवाब न दे सके। न्यायालय ने उनसे यह भी पूछा कि वर्तमान परिस्थितियों में जबकि अंतिम संस्कार के मामले में डीएम का एक रोल था, ऐसे में क्या उन्हें हाथरस में बनाए रखना उचित है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया कि सरकार मामले के इस पहलू को देखेगी व इस पर निर्णय लेगी।
वहीं न्यायालय ने पीड़िता के परिवार, अपर मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) व हाथरस डीएम प्रवीण कुमार को विस्तारपूर्वक सुनने के बाद अपने आदेश में कहा है कि तथ्यों से प्रतीत होता है कि मृतका का चेहरा दिखाने के परिवार के अनुरोध को प्रशासन ने स्पष्ट रूप से इंकार नहीं किया होगा लेकिन तथ्य यही है कि उनके बार-बार के अनुरोध के बावजूद इसे उनमें से किसी को भी नहीं दिखाया गया। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार का उल्लंघन किया गया और न सिर्फ पीड़ित परिवार बल्कि वहां मौजूद लोगों और रिश्तेदारों की भावनाओं को भी आहत किया गया।
लिहाजा हमारे समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दा है कि क्या आधी रात में जल्दबाजी से अंतिम संस्कार करके व बिना परिवार को मृतका का चेहरा दिखाए और आवश्यक धार्मिक क्रियाकलाप की अनुमति न देकर संविधान में प्रदत्त जीवन के अधिकार व धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन किया गया है। यदि ऐसा है तो यह तय करना होगा कि इसका कौन जिम्मेदार है ताकि उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके व पीड़िता के परिवार की क्षतिपूर्ति कैसे की जा सकती है।
न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की है कि आजादी के बाद शासन और प्रशासन का सिद्धांत ‘सेवा’ और ‘सुरक्षा’ होना चाहिए, न कि ‘राज’ और ‘नियंत्रण’ जैसा कि आजादी के पहले था। जिला स्तरीय अधिकारियों को ऐसी परिस्थितियों से डील करने के लिए सरकार की ओर से समुचित प्रक्रिया व दिशानिर्देश मिलना चाहिए। भविष्य में ऐसा विवाद न उत्पन्न हो, इस बावत भी न्यायालय विचार करेगी। न्यायालय ने अपने आदेश में अपर मुख्य सचिव के इस बयान को भी दर्ज किया कि सरकार जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए ऐसी परिस्थितियों में अंतिम संस्कार को लेकर दिशानिर्देश जारी करेगी।
न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने सख्ती से यह भी आदेश दिया है कि जो अधिकारी इस मामले की विवेचना से नहीं जुड़े हैं, वे अपराध के बारे में अथवा साक्ष्य संकलन के बारे में बयान न दें क्योंकि यह भ्रम पैदा कर सकता है। न्यायालय व जांच एजेंसियां इस मामले को देख रही हैं लिहाजा गैर जिम्मेदराना बयानबाजी से परहेज किया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप न करने की मंशा रखते हुए, हम मीडिया व राजनीतिक दलों से भी अनुरोध करते हैं कि वे ऐसा कोई विचार न व्यक्त करें जिससे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचे व पीड़िता के परिवार व अभियुक्तों के अधिकारों का उल्लंघन हो। न्यायालय ने कहा कि जिस प्रकार अभियुक्तों को ट्रायल पूर्ण होने से पहले दोषी नहीं ठहराना चाहिए, उसी प्रकार किसी को पीड़िता के चरित्र हनन में भी संलिप्त नहीं होना चाहिए।
मुआवजे की रकम को बैंक में जमा करें
न्यायालय ने कहा कि सरकार ने पीड़िता के परिवार के लिए मुआवजे की घोषणा की है लेकिन सम्भवतः वह उन्हें स्वीकार नहीं है क्योंकि परिवार के एक सदस्य ने कहा कि मुआवजा अब किसी काम का नहीं। फिरभी हम मुआवजे का प्रस्ताव परिवार को जल्द से जल्द दिया जाए और यदि वे लेने से इंकार करते हैं तो जिलाधिकारी किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज मिलने वाले खाते में इसे जमा कर दें, जिसके उपयोग के बारे में हम आगे निर्देश दे सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार आधी रात बाजार खाला थाना क्षेत्र स्थित धोबी घाट झुग्गी बस्ती में अचानक आग लग गई। कुछ ही देर में लपटों ने करीब 15 झोपड़ियों को अपनी जद में ले लिया। आग की तपिश से कई छोटे-बड़े सिलेंडर में धमाके हुए। इससे आग और विकराल हो गई। एकाएक आग लगने से झोपड़ी में रह रहे लोग सारा सामान छोड़कर भागे। मौके पर पहुंची 10 से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। मौके पर सीएफओ फायर के साथ लखनऊ पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे भी पहुंचे। आज सुबह लोग राख के ढेर से गृहस्थी के बचे सामान को बटोरते नजर आए।
जलकर राख हुई गृहस्थी को देखती महिला।
40 सालों से रह रहे थे लोग, आसपास थी 200 झोपड़ी
धोबी घाट पर 40 वर्षों से करीब 200 परिवार झोपड़ी बनाकर रहता है। रविवार रात आग कैसे लगी? इसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई होना मुश्किल है। घर में सो रही सबीना का कहना है कि रात करीब 1:30 बजे आग की लपटें उठना शुरू हुई। मैं अपने बच्चे को लेकर घर से भाग भागी, मेरे घर की गृहस्थी का सारा सामान जलकर राख हो गया।
वहीं, सन्नो का कहना है कि रात में मैं सो रही थी। अचानक सिलेंडर फटने की आवाज सुनाई दी, मैं बच्चे को लेकर बाहर भागी देखा तो बहुत तेज आग जल रही थी। मेरे घर का सारा सामान जल गया। मैंने किसी तरह अपनी जान बचाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ी और स्थानीय पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा दमकल की गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया। किसी जनहानि होने की अभी तक सूचना नहीं मिली है।
महिलाओं को समझाता पुलिस अफसर।
आग लगने की चल रही जांच
पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने लगभग 2 घंटे में आग पर काबू पा लिया। फिलहाल आग में कोई हताहत नहीं हुआ है। वहीं, सीएफओ विजय कुमार का कहना है कि हमें रात करीब 1:30 बजे आग लगने की सूचना मिली। फायर ब्रिगेड की 4 गाड़ियां चौक से मौके पर पहुंची। लेकिन आग भीषण थी कि इसलिए 4 गाड़ी हजरतगंज से, तीन गाड़ी इंदिरा नगर से मंगानी पड़ी। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
सिलेंडर को हटाता फायरकर्मी।अग्निकांड में लोगों के घरों में रखी गृहस्थी जलकर राख हो गई।
उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की दलित युवती से कथित बलात्कार व उसकी मौत मामले में आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अहम सुनवाई होनी है। यह मामला गरिमापूर्ण तरीके से अंतिम संस्कार टाइटल के तहत सूचीबद्ध है। पीड़ित परिवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच लखनऊ रवाना हो गया है। एक अक्टूबर को कोर्ट ने मामले को खुद नोटिस में लिया था।
कोर्ट ने प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी, डीजीपी एचसी अवस्थी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के अलावा हाथरस के डीएम और एसपी को तलब किया है। पीड़ित परिवार को भी कोर्ट में गवाही के लिए हाजिर रहना है। हाईकोर्ट में सरकार की तरफ से विनोद शाही पैरवी करेंगे, जबकि कोर्ट ने वरिष्ठ वकील जेएन माथुर को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) बनाया है।
पीड़ित परिवार को लखनऊ छह गाड़ियों से एस्कार्ट कर ले जाया जा रहा है।
परिवार के पांच लोग कोर्ट में देंगे गवाही
पीड़ित परिवार सुबह 5 बजे हाथरस से निकला। पीड़ित के माता-पिता, दो भाई और एक भाभी लखनऊ जा रहे हैं। एसडीएम अंजलि गंगवार और सीओ शैलेंद्र बाजपेयी ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रखी है। दो गाड़ियों में पीड़ित परिवार है, जबकि छह गाड़ियां उनके एस्कॉर्ट के लिए हैं। भाई ने कहा कि जो भी घटना हुई है, उसके बारे में कोर्ट को बताएंगे। जो घटना के वक्त मौजूद था, वह अपनी बात कोर्ट में रखेगा। इससे पहले उन्होंने रविवार रात लखनऊ जाने से मना कर दिया था। पीड़ित के भाई ने कहा कि रात में हमारे साथ कुछ भी हो सकता है। हमें प्रशासन पर भरोसा नहीं है।
सादी वर्दी में महिला पुलिस अधिकारी सुरक्षा में तैनात हैं।
सीबीआई आज घटनास्थल की जांच करेगी
उधर, केस दर्ज करने के बाद सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने हाथरस पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। जांच महिला डिप्टी एसपी सीमा पाहुजा कर रही हैं। सीबीआई ने रविवार को ही पुलिस से एफआईआर व दस्तावेज लिए हैं। सूत्रों की मानें तो आज सीबीआई टीम जांच करने के लिए घटनास्थल पर पहुंचेगी। टीम के साथ फोरेंसिक टीम भी मौजूद रहेगी और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सबूतों को इकट्ठा करेगी। जांच अधिकारियों से भी वार्ता करेगी। सीबीआई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पूर्व में फॉरेंसिक टीम द्वारा लिए गए जांच सैंपल और सभी संबंधित सबूतों को जुटाएगी।
क्या है पूरा मामला?
हाथरस में 14 सितंबर को 4 लोगों ने कथित रूप से 19 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया था। यह भी आरोप है कि उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और जीभ भी काट दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़ित की मौत हो गई। चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि दुष्कर्म नहीं हुआ था।
क्या हो रहा वायरल : सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि भाजपा नेता संबित पात्रा ने हाथरस दुष्कर्म केस के पीछे चीन और पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है।
और सच क्या है ?
अलग-अलग की वर्ड सर्च करने से भी इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली जिससे पुष्टि होती हो कि संबित पात्रा ने ऐसा कोई बयान लिया है।
पड़ताल के दौरान ही हमें ‘आज तक’ चैनल की एक रिपोर्ट मिली। जिसमें संबित पात्रा से हाथरस केस पर कोई ट्वीट न करने और चुप रहने की वजह पूछी गई है।
पत्रकार के सवाल के जवाब में संबित पात्रा ने कहा : बलात्कार जैसे गंभीर विषय पर ट्वीट कर देना या अपनी संवेदना व्यक्त कर देनी ही अंतिम पढ़ाव नहीं होता।
इन सबसे स्पष्ट है कि संबित पात्रा ने अपने किसी बयान में हाथरस मामले के पीछे पाकिस्तान और चीन को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
तारीख 14 सितंबर थी। देर शाम सीएम योगी आगरा मंडल के विकास कामों की समीक्षा कर रहे थे। उनके सामने सपा सरकार के प्रोजेक्ट मुगल म्यूजियम के अधर में लटके होने का मुद्दा उठा तो उन्होंने साफ कह दिया कि नए उत्तर प्रदेश में गुलामी की मानसिकता के प्रतीक चिन्हों का कोई स्थान नहीं। हम सबके नायक शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने मुगल म्यूजियम का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद से विवाद जारी है।
इतिहासकारों ने भी सीएम योगी के निर्णय पर ऐतराज जताया तो वहीं, अब मुगलों के आखिरी वंशज होने का दावा करने वाले प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा है कि अगर सरकार ने मुगल म्यूजियम का नाम बदलने का फैसला कर लिया है तो हम खुद आगरा में एक हजार गज की जमीन पर मुगलों का म्यूजियम बनाएंगे। आप जान लीजिए कि मुगलों पर उनका जो फैसला है, उससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। आगरा को लोग दुनिया भर में ताज की वजह से जानते हैं।
अपनी बच्चियों के साथ प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तूसी।
खाड़ी देशों में हो रही चर्चा, मोदी का नाम खराब कर रहे योगी
हैदराबाद में रहने वाले प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने सीएम योगी के फैसले को गलत ठहराया है। कहा कि यह बस आपसी सद्भाव को खत्म करने वाला फैसला है। इस फैसले से बस पीएम मोदी का नाम दुनिया भर में खराब हो रहा है। लोग जानते है कि यह फैसला सिर्फ दो समुदायों में आपसी मतभेद फैलाना है। लोग यूएस में, यूके में, खाड़ी देशों में इसी की बात कर रहे हैं। आखिर इससे दूसरे देशों में क्या प्रभाव जा रहा है? यह सोचना चाहिए।
प्रिंस तुसी कहते हैं कि हमें शिवाजी महाराज के नाम पर आपत्ति नहीं है। लेकिन, उनका कनेक्शन आगरा से जब है नहीं तो उनका म्यूजियम क्यों बनाया जाए? ताजमहल से निकल कर पर्यटक मुगलों के बारे में जानना चाहेगा न कि शिवाजी के बारे में।
मैं पीएम मोदी को इस बारे में चिट्ठी भी लिखूंगा। मैं उन्हें चिट्ठी में बताऊंगा कि पीएम मोदी की जो इमेज पूरी दुनिया में है, वह ऐसे लोगों की वजह से खराब होती है। मैं भाजपा को सपोर्ट नहीं करता बल्कि मैं पीएम मोदी को सपोर्ट करता हूं। क्योंकि उन्होंने अपने कामों से दुनिया भर में हिंदुस्तान का नाम रोशन किया है।
सीएम योगी के कहने से क्या मुगल हीरो नहीं रहेंगे?
सवाल उठाते हुए प्रिंस याकूब कहते हैं कि क्या सिर्फ सीएम योगी के कहने से मुगल हीरो नहीं रह जाएंगे? मुगलों को हीरो बताने की जरूरत नहीं है, वह हीरो हैं और रहेंगे। शाहजहां हुए, अकबर हुए उनके बारे में सब जानते हैं कि उन्होंने सबके लिए क्या किया है? बहादुरशाह जफर की कुर्बानी के बारे में दुनिया जानती है। यूपी में गरीबी है, कोरोना है, लोग बेरोजगार है, सीएम को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि इतिहास को बदलने की कोशिश करें।
राम मंदिर के लिए दूंगा सोने की ईंट
तूसी ने बताया कि मैंने वादा किया था कि रामलला के लिए मैं सोने की ईंट दूंगा, जिसके लिए मैंने पीएम का समय मांगा है। जैसे ही समय मिलेगा मैं सोने की ईंट उन्हें सौंपूगा। अयोध्या रामलला की थी तो वहां से मैंने मुगल का आखिरी वंशज होने के नाते बाबरी मस्जिद का दावा वापस लेने की बात कही थी। अब मैं अपने पैसों से हैदराबाद में एक मस्जिद बना रहा हूं। साथ ही किसी की भावना को ठेस न पहुंचे, इसलिए उसका नाम बाबर नहीं बल्कि बहादुर शाह जफर के नाम पर होगा।
प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तूसी।
कौन है प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तूसी?
प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तूसी खुद को मुगलों का वंशज बताते हैं। हैदराबाद के रहने वाले प्रिंस तुसी कहते है कि बहादुर शाह जफर की वह छठी पीढ़ी से है। ताजमहल को अपनी संपत्ति बताकर चर्चा में आए प्रिंस ने बाबरी मस्जिद पर भी अपना दावा ठोका था। यही नहीं प्रिंस तुसी का दावा है कि हैदराबाद की कोर्ट ने उनकी डीएनए रिपोर्ट को सही माना है और उन्हें प्रिंस का तमगा दिया है।
देश भर में विधायक और सांसदों के खिलाफ 4442 आपराधिक मामले स्पेशल कोर्ट में लम्बित हैं। राज्यों के हाईकोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए ब्योरे से यह बात सामने आई है। ऐसे सबसे ज्यादा मामले यूपी (उत्तरप्रदेश) के हैं। यहां 446 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 1217 मामले लंबित हैं। दूसरे नंबर पर बिहार है। यहां 256 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 531 मामले लंबित हैं।
भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट मित्र सीनियर एडवोकेट विजय हंसारिया ने इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की। रिपोर्ट के अनुसार देश के 2556 विधायक आपराधिक मामलों में आरोपी हैं।
इनमें से कई तो एक से ज्यादा आपराधिक केस के अभियुक्त हैं। कानून बनाने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ करीब 413 ऐसे मामले हैं, जिनमें अधिकतम सजा उम्रकैद है। ऐसे 174 मामले अभी वर्तमान एमएलए व सांसदों के खिलाफ लम्बित हैं।
ये है राज्यों का ब्योरा ...
उत्तरप्रदेश में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 1217 मामले निचली अदालतों में लम्बित हैं। ये 446 वर्तमान विधायक व पार्षदों के खिलाफ हैं।
बिहार में ऐसे 531 लम्बित मामलों में 256 आपराधिक मामले सिटिंग एमएलए व एमएलसी के खिलाफ हैं।
तमिलनाडु में 324, महाराष्ट्र में 330 व ओडिसा में 331 आपराधिक मामले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ हैं।
रिपोर्ट के अनुसार लम्बित पड़े आपराधिक मामलों में अधिकांश भ्रष्टाचार, मनी लाउंड्रिंग, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने आदि को लेकर दर्ज हुए हैं। इनमें से कई मामलों पर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से रोक भी लगी हुई है।
कांग्रेस में 23 नेताओं की चिट्ठी पर अभी विवाद नहीं थमा है। इस बीच एक नई चिट्ठी पार्टी के सामने चुनौती बनकर आ गई है। इस बार चिट्ठी उत्तर प्रदेश से है। सूत्रों के मुताबिक पिछले साल कांग्रेस से निकाले गए 9 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को यह भेजी है। चिट्ठी लिखने वालों में प्रमुख नाम पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी के हैं।
चिट्ठी में कहा गया है कि सोनिया जी, पार्टी को महज इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाने से बचा लें। परिवार के मोह से ऊपर उठकर काम करें। पार्टी की लोकतांत्रिक परंपराओं को फिर से स्थापित करें। यूपी में पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। इस बात की आशंका है कि आपको राज्य मामलों के प्रभारी (प्रियंका गांधी) ने मौजूदा स्थिति के बारे में नहीं बताया है।
हम लगभग एक साल से आपसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट की मांग कर रहे हैं, लेकिन मना कर दिया जाता है। हमने अपने निष्कासन के खिलाफ अपील की थी। केंद्रीय अनुशासन समिति को इस पर विचार करने का समय नहीं मिला। पार्टी के पदों पर उन लोगों का कब्जा है, जो वेतन के आधार पर काम कर रहे हैं। वे पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं। ये नेता पार्टी की विचारधारा से परिचित नहीं हैं, लेकिन उन्हें यूपी में पार्टी को दिशा देने का काम सौंपा गया है। ये लोग उन नेताओं के प्रदर्शन का आकलन कर रहे हैं, जो 1977-80 के संकट के दौरान कांग्रेस के साथ चट्टान की तरह खड़े थे।
लोकतांत्रिक मानदंडों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें अपमानित किया जा रहा है। वास्तव में, हमें मीडिया से हमारे निष्कासन के बारे में पता चला था, जो राज्य इकाई में नई कार्य संस्कृति की बात करता है। नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा मामलों की ओर से आंखें मूंद ली गईं तो कांग्रेस को यूपी में तगड़ा नुकसान होगा, जो कभी पार्टी का गढ़ हुआ करता था।
फेफना थाना क्षेत्र में सोमवार रात एक निजी चैनल में कार्यरत पत्रकार की गोली मारकर हत्या की गई है। बताया जाता है कि थाने से 500 मीटर दूर फेफना गांव है जहां मृतक रतन सिंह का आवास भी था। यहीं 4 से 5 हमलावरों ने उन्हें गांव के प्रधान के घर मे घेर कर गोली मार दी। पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच कर रहे हैं। मामले में गांव के प्रधान के शामिल होने की बात कही जा रही है।
पहले पीटा गया, फिर सिर में गोली मारी
जानकारी के मुताबिक, रतन सिंह दिन भर काम के बाद शाम को गांव लौटे थे। इसके बाद वह गांव में किसी से बातचीत कर रहे थे। बातचीत खत्म होने के बाद वह वापस घर की ओर पैदल चल पड़े। जहां उन पर 4 से 5 बदमाशों ने फायरिंग कर दी। वह दौड़कर प्रधान झाबर सिंह के घर पहुंचे तो उनको हमलावरों ने पीटा फिर सिर में गोली मार फरार हो गए।
गांव के प्रधान का साजिश में आया नाम
बताया जाता है कि गांव के प्रधान झाबर सिंह के घर मे बदमाशों ने पहले पत्रकार रतन सिंह को पीटा फिर सिर में गोली मारी। देर शाम हुई घटना में साजिशकर्ता के तौर पर प्रधान का नाम भी लिया जा रहा है। वहीं चर्चा है कि कुछ दिन पहले रतन सिंह का पाटीदार से विवाद हुआ था। जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी मिली थी।
हर एंगल से हो रही है जांच
जिले के एसपी देवेंद्र नाथ ने बताया कि सूचना के बाद मौके पर फोर्स पहुंच गयी है। जानकारी मिली है कि बदमाशों ने ग्राम प्रधान के घर के कैम्पस में घेर कर रतन सिंह को गोली मारी है। अभी आपसी विवाद के एंगल को भी देखा जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी होगा उसे पकड़ा जाएगा।
स्वतंत्रता दिवस पर उत्तर प्रदेश कोरोना की जंग में सबसे बड़ी सौगात मिली है। यहां किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में शनिवार की शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने देश के सबसे ज्यादा क्षमता वाले प्लाज्मा बैंक का वर्चुअल उद्घाटन किया। ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर तूलिका चंद्रा ने बताया कि प्लाज्मा बैंक की क्षमता दिल्ली, महाराष्ट्र के अस्पतालों से ज्यादा है। इसमें 830 यूनिट प्लाज्मा संग्रह करने की क्षमता है। अब तक 45 लोग कोरोना को मात देकर प्लाज्मा दान कर चुके हैं। 25 मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया भी जा चुका है।
राज्यपाल ने बोलीं- यह थैरेपी कारगर साबित हो रही
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि कोरोनावायरस के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी कारगर है। प्लाज्मा डोनेशन के लिए संक्रमण मुक्त हो चुके नागरिकों को प्रेरित करें, जिससे प्लाज्मा की कमी ना रहे। उन्होंने देश के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयास से कोरोनावायरस से होने वाली मौतों की संख्या भारत में काफी कम है। इलाज के लिए सुविधाओं में विस्तार हो रहा है। प्रदेश में प्लाज्मा थैरेपी से इलाज शुरू किया जा चुका है तथा आने वाले समय में लोग स्वप्रेरणा से प्लाज्मा देने आगे आ सकें। इसके लिए भ्रांतियां दूर कर उन्हें प्लाज्मा डोनेशन के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसके लिए चिकित्सा सेवाओं में संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कोरोना रोगियों को स्वस्थ करने में केजीएमयू के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अच्छा कार्य किया गया है। इसे बरकरार रखना होगा।
वीसी ने कहा- यह गर्व और गौरव का विषय
कार्यक्रम में केजीएमयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ बिपिन पुरी ने प्लाज्मा बैंक की स्थापना को गर्व व गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में कोरोनावायरस से बचाव के लिए विभिन्न दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन कोई भी यह सटीक दावा नहीं करता है कि यह दवाएं कोरोनावायरस पर कितनी असरदार हैं, लेकिन ऐसा देखा गया है कि प्लाज्मा थैरेपी से कोरोनावायरस से ग्रस्त रोगियों की हालत में सुधार होता है और इसी गंभीरता को देखते हुए कुलाधिपति ने इस प्लाज्मा बैंक को गंभीरता से लिया और यह कार्य केजीएमयू में संभव हो पाया। कुलपति ने कहा कि इस प्लाज्मा बैंक में दान कर्ताओं द्वारा दान किए गए प्लाज्मा को स्टोर करने, इसके नमूने को एकत्रित करने के साथ ही इसे अन्य सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों को दिए जाने की सुविधा उपलब्ध होगी।
प्लाज्मा फेरेसिस की प्रक्रिया पूर्णतया सुरक्षित एवं हानि रहित
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि प्लाज्मा फेरेसिस की प्रक्रिया पूर्णतया सुरक्षित एवं हानि रहित है। इस प्रक्रिया में दानकर्ता का ब्लड प्लाज्मा फेरेसिस मशीन में डाला जाता है तथा केवल वही ब्लड प्रयोग में लाया जाता है। जिसमें कोरोना संक्रमण से लड़ने की एंटीबॉडी होती है एक आम इंसान में सामान्यतः 5 से 6 लीटर रक्त होता है। जबकि इस प्रक्रिया के लिए सिर्फ 400 से 500 मिलीलीटर लिया जाता है और रक्त का अवशेष प्लाज्मा फेरेसिस मशीन द्वारा शुद्ध करके उनके शरीर में पहुंचा दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में 13 साल की बालिका के साथ रेप के बाद हत्या कर दी गई। मामले में दो आरोपियों का पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई है। दो आरोपियों पर रासुका के तहत भी कार्रवाई की गई है।
घटना नेपाल बॉर्डर पर ईसानगर थाना क्षेत्र के एक गांव की है। यहां रहने वाली 13 साल की बच्ची का शव शुक्रवार रात गन्ने के खेत में मिला था। बच्ची दोपहर से लापता थी। पिता का आरोप है कि बच्ची की खोजबीन की गई तो देर रात उसका शव गांव के रहने वाले एक शख्स के खेत में मिला। उसकी आंखें निकली हुई थीं। जुबान कटी हुई थी। गला दुपट्टे से कसा गया था।
रेप के बाद हुई हत्या
धौरहरा सर्किल के पुलिस क्षेत्राधिकारी अभिषेक प्रताप ने बताया कि बच्ची से रेप के बाद हत्या की बात सामने आई थी। जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी हुई। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिस खेत में बच्ची का शव मिला था, वह खेत एक आरोपी का है। आंख फोड़ने या निकालने की बात झूठी है। आरोपियों पर एनएसए की कार्रवाई कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
कानपुर शूटआउट को 45 दिन हो चुके हैं। लेकिन आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा मामला गैंगस्टर विकास दुबे पर एफआईआर लिखाने वाले राहुल तिवारी व चौबेपुर थानाध्यक्ष रहे विनय तिवारी से जुड़ा है। दोनों की एक बातचीत का ऑडियो सामने आया है। जिसमें विनय तिवारी राहुल को धैर्य बनाए रखने और गैंगस्टर विकास दुबे पर कार्रवाई करने की बात कह रहा है। ऑडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सच में विनय तिवारी राहुल की मदद करना चाहता था या जिस तरह से विकास दुबे थाने को चला रहा था उसी की तरीके से सारी पटकथा लिखी जा रही थी?
बता दें कि, दरोगा विनय तिवारी को मुखबिरी करने के आरोप में और दबिश के वक्त मौके से भाग जाने के आरोप में जेल भेज दिया गया था। उन पर केस भी दर्ज है। वहीं, वादी राहुल तिवारी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद सामने आया था। वॉयरल ऑडियो की पुष्टि दैनिक भास्कर नहीं करता है।
ऑडियो में क्या-क्या हुईं बातें-
ऑडियो में तत्कालीन थाना प्रभारी विनय तिवारी से वादी राहुल तिवारी कह रहा है कि, साहब मैं और एसओ साहब गए थे, उसने (विकास दुबे) बहुत मारा पीटा है और बंधक बना लिया था। जिसके बाद विनय तिवारी ने सवाल किया कि राहुल हमारे ऊपर भरोसा है कि नहीं? हमारे ऊपर भरोसा रखो। जल्द ही तुम्हें हमारी कार्रवाई दिखाई देगी। रही खेत वाली बात तो कागज से तुम कमजोर हो। यह बात मैं भी जानता हूं और तुम भी जानते हो। अगर तुम्हें मेरे ऊपर भरोसा है तो बस थोड़ा इंतजार कर लो। उसके बाद हमारी कार्रवाई देख लेना और मैं किस टाइप का आदमी हूं और क्या कार्रवाई करेंगे यह भी देख लेना। हम तुम्हें अभी बता नहीं सकते कि हम क्या कार्रवाई करेंगे। लेकिन जो भी कार्रवाई करेंगे तुम्हें पता जरूर चल जाएगा। अगर भरोसा है हमारे ऊपर थोड़ा सा धीरज रखो बस। मुझे ज्यादा नहीं मात्र 1 हफ्ते का समय दो राहुल तुम देखना है। 1 हफ्ते में इनकी (विकास दुबे) मैं वह दशा बनाऊंगा इसमें समझ में आ जाएगा कि मैं चीज क्या हूं।
एक थानाध्यक्ष के ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं और बहुत कुछ सोचना पड़ता है। इसलिए मैंने उस दिन वहां पर बहुत कुछ निभाया। लेकिन ऐसा थोड़ी ना है कि सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमारे पास एक नहीं 20 रास्ते हैं और यह बात वह भी जानता है अच्छी तरीके से। राहुल अगर भरोसा है मेरे ऊपर तो थोड़ा सा समय दे दो। मैं बिना किसी लालच के तुम्हारे साथ गया था और जो कुछ हो रहा है वह मुझे ना काबिले बर्दाश्त है। तुमसे ज्यादा मेरी स्थिति खराब है और जितनी जल्दी से जल्दी हो सके तो मैं फैसला करूंगा। जो कुछ तुम्हारे साथ हुआ उसका कष्ट तुमसे ज्यादा मुझको है। थोड़ा सा धीरज रखो। कोई भी ऐसा काम मत करना जिससे कि मैं अपने आप को माफ न कर पाऊं। और कुछ करना नहीं अपने बीवी बच्चों के साथ इतना बड़ा अन्याय मत करना कुछ भी हो जाए। मुझसे ज्यादा तुम को परेशानी है। राहुल भरोसा रखो हमारे ऊपर कार्रवाई तुमको दिखाई पड़ेगी।
दो जुलाई की रात को हुआ था बिकरु कांड
2 व 3 जुलाई को पुलिस की एक टीम विकास दुबे के घर दबिश देने गई थी, जिसकी जानकारी भनक विकास दुबे को पहले ही पुलिस के द्वारा लग गई थी। इसके बाद विकास दूबे ने पुलिस वालों पर हमला कर दिया, जिसमें उसके कई साथी मौजूद थे। इस हमले से पुलिस के 8 जवान शहीद हो गए थे। जिसके बाद पुलिस ने कई राज्यों में सर्च अभियान चलाया।
इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। उत्तर प्रदेश आते समय कानपुर के पास पुलिस की गाड़ी पलट गई। इसी बीच भागने के दौरान एनकाउंटर में मारा गया।
पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी की आज दूसरी पुण्यतिथि है। रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोक भवन में उनकी प्रतिमा पर लोकार्पण करेंगे। बता दें कि अटलजी की 95वीं जयंती पर 8 माह पहले लोकभवन में 25 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा लगाई गई थी। अटलजी का निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ था।
भारतीय जनता पार्टी के प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष थे अटल जी
6 अप्रैल 1980 को बंबई में भारतीय जनता पार्टी का जन्म हुआ और अटल जी उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए थे। इस महाधिवेशन में आपका जो भव्य स्वागत किया गया वह ऐतिहासिक था। शोभायात्रा में देश के कोने-कोने से आए पच्चीस हजार से अधिक लोगों ने अपने जननायक को अभूतपूर्व सम्मान प्रदान किया था।
जन्म, बाल्यकाल और शिक्षा
उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के प्रसिद्ध तीर्थस्थान बटेश्वर में एक धर्मावलंबी कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार रहता था। अटलजी के पितामह प. श्यामलाल बटेश्वर में ही जीवनपर्यंत रहे किंतु अपने पुत्र कृष्ण बिहारी को ग्वालियर में बसने की सलाह दी। ग्वालियर में अटलजी के पिता पं. कृष्ण बिहारी जी अध्यापक बने। अध्यापन के साथ-साथ वे काव्य रचना भी करते थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम के स्वर भरे रहते थे। वे उन दिनों ग्वालियर के प्रख्यात कवि थे। अपने अध्यापक जीवन में उन्नति करते-करते वे प्रिंसिपल और विद्यालय-निरीक्षक रहे। ग्वालियर राजदरबार में भी उनका मान-सम्मान था अटलजी की माताजी का नाम कृष्णा देवी था। ग्वालियर में शिंदे की छावनी में 25 सितंबर सन् 1925 को ब्रह्ममुहूर्त में अटलजी का जन्म हुआ था। पं. कृष्ण बिहारी के चार पुत्र अवध बिहारी, सदा बिहारी, प्रेम बिहारी, अटलबिहारी तथा तीन पुत्रियाँ विमला, कमला, उर्मिला हुईं। अटलजी के सभी भाई बहनों का निधन हो चुका है।
उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख पार हो चुकी है। शनिवार को 24 घंटे में 4814 नए मरीज बढ़े तो 58 लोगों की मौत हो गई। राज्य में अब तक 2393 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदेश में अब तक 1,50,061 मरीज सामने आ चुके हैं। इस तरह यूपी सर्वाधिक संक्रमित मरीज वाली सूची में छठे स्थान पर है। नए मरीजों के बढ़ने की दर यही रही तो आज यूपी दिल्ली को पछाड़कर टॉप-5 संक्रमित राज्यों में शामिल हो जाएगा। दिल्ली में अब तक 1,51,928 संक्रमित मिल चुके हैं।
हालांकि, राज्य में कोरोना से उबरने वाले मरीजों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। अब तक 96,231 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और अब एक्टिव के 51,437 हैं। वहीं, राज्य में सर्वाधिक एक्टिव केस लखनऊ में हैं। यहां कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। शनिवार को 24 घंटे में यहां 671 रोगी मिले हैं। जिसके बाद यहां 7,462 एक्टिव केस हैं।
लखनऊ में 24 घंटे में 387 डिस्चार्ज
शुक्रवार को लखनऊ में 387 मरीजों ने कोरोनावायरस वायरस को मात देने में कामयाबी हासिल की है। मरीजों का इलाज केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान, एरा मेडिकल कॉलेज, इंटीग्रल, प्रसाद, लोक बंधु राज नारायण, राम सागर मिश्रा हॉस्पिटल में चल रहा था। डॉक्टरों ने मरीजों की छुट्टी के बाद घर में 14 दिन एकांत में रहने की सलाह दी है।
लखनऊ में इन मरीजों की हुई मौत
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि अयोध्या निवासी 3 तीन दिन की नवजात में 13 जुलाई को संक्रमण की पुष्टि हुई। उसी दिन उसको कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया। वहीं 14 अगस्त को रात्रि 10 बजे उसने दम तोड़ दिया। डॉ सुधीर के मुताबिक नवजात में कोरोना का अब तक का यह पहला मामला है। जिसमें उसकी मौत हुई है। इसके अलावा लखनऊ चिनहट के 54 वर्षीय पुरुष की कोरोना की वजह से मौत हो गयी। यह मृतक संक्रमित होने के साथ ही अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित था। डालीगंज की 42 वर्षीय महिला व दौला कदम के 50 वर्षीय पुरूष की भी कोरोना से मौत हो गयी। वहीं लखनऊ के ही 59 वर्षीय पुरुष ने कोरोना वार्ड में दम तोड़ दिया।
इसके अलावा उरई के 55 वर्षीय कोरोना मरीज ने दम तोड़ दिया। इस मृतक मरीज में 6 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि की गई थी। कानपुर के महाराजपुर का 32 वर्षीय कोरोना संक्रमित मरीज की भी मौत हो गयी। जबकि उन्नाव बांगरमऊ के 80 वर्षीय बुजुर्ग मरीज ने कोरोना वार्ड में दम तोड़ दिया। केजीएमयू प्रवक्ता का कहना है कि ये सभी मृतक संक्रमित होने के साथ साथ अन्य रोगों से भी ग्रसित थे। उन्होंने बताया कि पहले से पीड़ित मरीजों में कोरोना संक्रमित होने की वजह से स्थिति नाजुक हो जाती है। ऐसे में कोरोना के खिलाफ लड़ाई को प्राथमिकता देनी पड़ती है।
24 घंटे में यहां 58 लोगों की मौत
24 घंटे में सबसे ज्यादा संक्रमित मिलने का रिकॉर्ड लखनऊ के नाम रहा तो सर्वाधिक मौत भी यहीं हुई। यहां 14 संक्रमितों की जान गई है। इसके अलावा सहारनपुर में 05, कानपुर में 04, वाराणसी, प्रयागराज में 03-03, गोरखपुर ,मुरादाबाद, गाजीपुर, बस्ती, हरदोई ,फर्रुखाबाद , गोंडा व अंबेडकरनगर में 02-02 और बरेली झांसी, जौनपुर ,आजमगढ़, शाहजहांपुर, उन्नाव, बहराइच, मिर्जापुर, इटावा, रायबरेली, शामली और कौशांबी में एक-एक रोगी की मौत हुई है।
आज 4 अगस्त, 2020 और दिन मंगलवार। सोमवार को रक्षाबंधन के साथ सावन माह का समापन हो गया। आज से भाद्रपद शुरू हो रहा है। भाद्रपद का मतलब है भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव और भगवान श्री गणेश का घर-घर आगमन। इसी महीने में त्योहारी सीजन परवान चढ़ने वाला है।
चार अगस्त का अपना भी लंबा-चौड़ा इतिहास है। सदाबहार गायक किशोर कुमार का जन्मदिन है। 1935 में आज ही के दिन ब्रिटिश राजशाही ने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट को मंजूरी दी थी। इतना ही नहीं, 1956 में आज ही के दिन देश का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर अप्सरा शुरू हुआ था।
आइये, चलते हैं खबरों की ओर...
1. अयोध्या में आज राम अर्चना, बुधवार को मोदी रखेंगे मंदिर की आधारशिला
भगवान श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने की शुभ घड़ी नजदीक आ गई है। सोमवार को गणेश जी की पूजा के साथ तीन दिन का अनुष्ठान शुरू हो गया। इसके बाद माता सीता की कुलदेवी छोटी देवकाली और भगवान राम की कुलदेवी बड़ी देवकाली की पूजा की गई।
आज अयोध्या के हनुमानगढ़ी में सुबह 8 बजे से राम अर्चना शुरू होगी। साल में एक बार होने वाली निशान पूजा भी होगी। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले हनुमानगढ़ी जाएंगे। वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विशेष पूजा करेंगे। उसके बाद दोपहर 12 बजे राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे।
इस विशेष प्रसंग के महाकवरेज के लिए हमने भी खास तैयारी की है। लिहाजा, पल-पल की रिपोर्ट सबसे पहले आपको दैनिक भास्कर ऐप और वेबसाइट पर पढ़ने को मिलती रहेगी। इसी कड़ी में पेश है हमारी विशेष पेशकशः
2. मुंबई पुलिस का दावा- सुशांत की मौत की जांच सही दिशा में
फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। जांच, सेलिब्रिटी की बयानबाजी और सियासत ने इस मामले को इतना दिलचस्प बना दिया है कि कुछ दिनों में कोई भी फिल्मकार इस पर सस्पेंस थ्रिलर बनाने की घोषणा कर सकता है।
हर दिन नया पहलू सामने आ रहा है। सोमवार को मुंबई पुलिस इस मामले को लेकर पहली बार मीडिया से मुखातिब हुई। इस मामले की जांच में बिहार के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाए। वहीं, जांच के लिए बिहार से मुंबई पहुंचे एक अधिकारी को महानगर पालिका ने 14 दिन के लिए क्वारैंटाइन में भेज दिया। कुल मिलाकर, फिल्म का प्लॉट ही तैयार हो रहा है।
3. बड़ी कंपनियों के शेयर में तेजी से आई बाजारों में रिकवरी
कोरोनावायरस की वजह से फरवरी में शेयर बाजारों में मंदी की आशंका दिखने लगी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च को कोरोनावायरस को महामारी घोषित किया। इसके बाद तो मार्केट में भगदड़ ही मच गई। बाजार गिरते चले गए। भारत समेत दुनियाभर के देशों में लॉकडाउन की वजह से भीषण मंदी के आसार बने।
अप्रैल के बाद हालात सुधरे। अब बाजार काफी कुछ रिकवर कर चुके हैं। लेकिन, उसका श्रेय भी रिलायंस समेत दस बड़ी कंपनियों को जाता है। इंडेक्स में रिकवरी में सबसे ज्यादा लाभ उन्हें ही मिला है। मिड-कैप्स और स्मॉल-कैप्स तो अब भी रिकवरी के लिए जूझते नजर आ रहे हैं। यह कैसे हुआ, इसे बताती खबर पढ़िये...
4. लद्दाख में चीन की सीमा पर हालात अब भी तनावपूर्ण
चीन ने दुनिया को कोरोनावायरस दिया और हमें सीमा पर तनाव अलग से। दौलत बेग ओल्डी और देपसान्ग मैदानों में चीन ने 17 हजार जवान तैनात किए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारतीय सेना भी जोश के साथ तैनात है।
भारत ने इन इलाकों में बड़ी संख्या में जवान तैनात किए हैं। टी-90 टैंक की रेजीमेंट भी चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा जिसे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तैनात है। इसे चीनी सेना की किसी भी नापाक हरकत का जवाब देने के लिए भेजी गई है।
राम की पैड़ी से करीब 5 किमी दूर शहर के बाहरी हिस्से में कुम्हारों का गांव जयसिंहपुर है। गांव के कुम्हारों को श्रीराम जन्मभूमि पूजन को भव्य बनाने के लिए प्रशासन की तरफ से 1 लाख दीयों का आर्डर मिला है। लॉकडाउन में बेहाल हुए कुम्हारों के लिए यह आर्डर एक संजीवनी की तरह है।
हालांकि, ऑर्डर विनोद प्रजापति को मिला है लेकिन 600 लोगों की आबादी वाले 40 घरों को यह आर्डर बांट दिया गया है। कोई 5 हजार तो कोई 7 हजार दीये बना रहा है। कुम्हारों का कहना है कि लॉकडाउन में हालात बहुत खराब हो गए थे, लेकिन भूमिपूजन हमारे लिए गर्मी के बाद बारिश की तरह ही है।
तस्वीर जयसिंहपुर की है। भूमिपूजन के लिए दीये तैयार किए जा रहे हैं। 5 अगस्त को पीएम मोदी भूमिपूजन कार्यक्रम के लिए आएंगे।
तीन साल में गांव के 80% लोग अब पुरखों के रोजगार से जुड़े
घर के बरामदे में बैठे विनोद इलेक्ट्रिक चाक पर दीये बना रहे हैं। घर के युवा और महिलाएं दीयों को धूप में रखने और जो सूख गए हैं, उन्हें सहेजने का काम कर रही हैं। बातचीत में विनोद बताते हैं कि 30 साल पहले हम लोगों के हालात सही थे। इन्ही मंदिरों में प्रसाद वगैरह मिट्टी के बर्तनों में जाया करता था। होटलों पर मिट्टी के कुल्हड़ और गिलास हुआ करते थे। समय पलटा और मिट्टी की जगह प्लास्टिक ने ले ली।
इसके बाद हमें पुरखों का काम छोड़ कर दूसरों के यहां नौकरी करनी पड़ती थी। पैसा भी इतना नही मिलता था कि घर का खर्च ढंग से चल सके। अब पिछले तीन साल से जब से अयोध्या में दीपोत्सव मनाया जाने लगा है तब से हालात में सुधार आया है। अभी लॉकडाउन में गांव के जो लड़के बाहर कमाने-धमाने गए थे लौट कर आये हैं तो उन्हें भी काम मिल गया है। गांव वालों को आखिर क्या चाहिए। घर परिवार चलता रहे तो कौन बाहर जाना चाहता है। गांव के लगभग 80% युवा अपने पुरखों के रोजगार से जुड़ गए हैं।
विनोद कहते हैं कि गांव के 80 फीसदी युवा अब पुरखों के रोजगार से जुड़ गए हैं। जब से अयोध्या में दीपोत्सव मनाया जा रहा है तब से हालात सुधरे हैं।
फ्रिज खरीदा, घर बनवाया और शादी-ब्याह भी किया
विनोद के बेटे राकेश बताते हैं कि मैं पहले रेलवे में ऐसी कोच अटेंडेंट का काम करता था। जब 2017 में हमें 2.5 लाख दियों का आर्डर मिला तो हम घर पर ही रुक गए। मैं और मेरे दो भाई, पिता जी, मां और पत्नी ने मिलकर दीए तैयार करने शुरू किए। गांव वालों को भी ऑर्डर बांट दिया।
उस वक्त हमसे 140 रुपए प्रति सैकड़ा दीये लिए गए थे। हमारे साथ- साथ गांव वालों को भी फायदा हुआ। जब दोबारा 2018 में भी आर्डर मिला तो हमने नौकरी छोड़ दी और अपने परिवार के साथ यही काम करने लगे। साल में एक बार बड़ा ऑर्डर मिल जाता है। जबकि, दूसरे मंदिरों में भी और तीज त्योहार पर दिया जाता है।
इसके साथ ही थोड़ा बहुत इधर उधर से भी ऑर्डर मिल जाता है। इसलिए अब नौकरी छोड़ने का कोई मलाल नहीं है। राकेश कहते हैं कि अब गांव में ज्यादातर लोगों के घरों में टीवी, फ्रिज और मोटर साइकिल वगैरह है। हमने भी पिछले साल अपना घर सही करवाया है। घर के आगे टीन शेड डलवाया है ताकि दीयों को स्टोर कर सके।
25 से 30 हजार साल की बचत हो जाती है, लॉकडाउन में लगा सब खर्च हो जाएगा
विनोद के बगल रहने वाले अशोक कुमार को 6 हजार दीये बनाने हैं। अशोक बताते है कि मैं रोडवेज में मिस्त्री था। 20-25 साल हो गए थे, 2013 में हम लोगों से भी आईटीआई की डिग्री मांग ली गई, जो हमारे पास नहीं थी तो हम लोग घर पर ही रह गए। 3 -4 साल बहुत परेशान रहे, लेकिन अयोध्या दीपोत्सव की वजह से हमें नया जीवन मिल गया।
हर साल 25-30 हजार की बचत हो ही जाती है। लॉकडाउन लगा तो कोई खरीदार नहीं मिल रहा था और न ही मंदिरों में बहुत दीये जा रहे थे, हम लोग परेशान थे कि जो कुछ बचा खुचा है वह भी खत्म हो जाएगा, लेकिन प्रभु सबकी सुनते हैं। सावन का महीना जिसमें काम बंद रहता है उसमें भूमि पूजन की वजह से हमें बैठे-बिठाए काम मिल गया।
भूमिपूजन कार्यक्रम के लिए दीये तैयार किए गए हैं। उस दिन अयोध्या में दिवाली जैसा नजारा देखने को मिलेगा।
डिमांड बढ़ी तो छुट्टी पर आने वाले गांव के लोगों को भी रोजगार मिला
विनोद बताते है कि अभी भी गांव के कुछ युवा बाहर कमा खा रहे हैं, लेकिन होली-दीवाली पर आते- जाते रहते हैं। जब वह दीपावली पर आते हैं तो मालिक उनकी पगार काट लेता है। लेकिन, अब उनको इसकी चिंता नहीं रहती है। क्योंकि दीपावली में जितने दिन रुकते हैं यहीं उन्हें कम मिल जाता है। जिससे उनकी कमाई भी हो जाती है और छुट्टी भी बिता लेते हैं। मार्केट में भी डिमांड बढ़ने से हम लोगों की स्थिति थोड़ी अच्छी हुई है।
सरकार से मिला है 16 हजार रु. का इलेक्ट्रिक चाक
गांव के ही राजेश बताते हैं कि सरकार ने 2018 में हमें इलेक्ट्रिक चाक दिया , जोकि मोटर से चलता है। तकरीबन 16 हजार का है। इस पर हमारा काम दोगुनी स्पीड से होता है। साथ ही फावड़ा, तसला, मुंगरी, हथौड़ी जैसे समान भी सभी गांव वालों को मिले हैं। गांव वालों के नाम जमीन का पट्टा भी है। लेकिन, वहां मशीन से खुदाई नहीं कर सकते हैं, इसलिए मिट्टी का डम्पर मंगवाते हैं जो 4000 रुपए पड़ता है।
जब से अयोध्या में दीपोत्सव हो रहा है तब से यहां के कुम्हारों को रोजगार मिला है। हर साल 25-30 हजार रु की बचत हो जाती है।
30 साल पुरानी परंपरा लागू हो अयोध्या में तो और सुधर सकते हैं हालात
अशोक कहते है कि 30 साल पहले मंदिरों में ज्यादातर प्रसाद वगैरह मिट्टी के बर्तन में होता था। तब प्लास्टिक का चलन नहीं था। जब से प्लास्टिक आई है मंदिर और दुकानदारों ने भी हमारी सुध नहीं ली और हम बाजार से बाहर होते चले गए। हमारी सरकार से अपील है कि सभी धार्मिक स्थलों पर न सही तो कम से कम अयोध्या में मंदिरों में मिट्टी के बर्तन में प्रसाद का नियम लागू कर दे। इससे प्लास्टिक से राहत मिलेगी और हमें भी फायदा मिलेगा।
एक व्यक्ति का नहीं पूरे परिवार का बिजनेस है
बातचीत के दौरान ही हल्की रिमझिम बारिश शुरू हुई तो कैमरा देख जो महिलाएं घर मे थीं वह भी बाहर निकल आईं और घर के मर्दों के साथ मिलकर दीयों को बारिश से बचाने के लिए सहेजने लगीं। राकेश कहते हैं कि घर की महिलाएं भी चाक चलाना जानती हैं। दरअसल, ये एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे परिवार के साथ मिलकर चलाने वाला बिजनेस है।
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यहां सुबह 4 बजे से जब बाजार में लगे लाउड स्पीकर और मंदिरों में रामधुन बजनी शुरू होती है, तो अयोध्या जाग जाती है। सड़कों पर लोग थाली में फूल अगरबत्ती लिए बड़े-बड़े कदमों से मंदिरों की तरफ जाते हुए दिखाई पड़ते हैं। एक अनुमान के मुताबिक अयोध्या में 5000 से ज्यादा मंदिर है। छोटी-छोटी गलियों में हर घर मे राम-सीता की पूजा होते आपको दिखाई पड़ जाती है।
हम आपके लिए अयोध्या के तीन ऐसे ही मंदिरों की कहानी लाए हैं, जो अपनी अलग परंपरा, इतिहास की वजह से अन्य मंदिरों की कतार से अलग खड़े दिखाई पड़ते हैं। पेश है अयोध्या के अनोखे मंदिरों पर एक रिपोर्ट...
पहला मंदिर: यहां गर्भगृह में 100 सालों से नहीं लगी बिजली, हमेशा रथ पर सवार रहते हैं राम
अयोध्या में राम को पूजने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। ऐसे ही अयोध्या में दक्षिण पंथ के दो मंदिर विजय राघव राम और अम्मा जी का मंदिर है। यह दोनों दक्षिण भारत परंपरा से राम की पूजा अर्चना करते हैं। इन दोनों मंदिरों की खास बात है कि यहां गर्भ गृह में लाइट नहीं जलाई जाती है।
अम्मा जी के मंदिर के महंत वेंकटाचार्य स्वामी कहते हैं कि गर्भ गृह का मतलब गर्भाशय से होता है। गर्भ में जब बच्चा होता है तो उसे कोई आर्टिफिशियल लाइट नहीं दी जाती है। आज के संदर्भ में देखें तो अब गर्भवती महिला का एक्सरे या सिटी स्कैन से परहेज किया जाता है।
उसी प्रकार गर्भगृह में श्रीराम भगवान को कोई तकलीफ न हो इसलिए लाइट नहीं लगवाई जाती है। हो सकता है उस लाइट की वजह से भगवान को कोई दुर्घटना का सामना करना पड़े इसलिए दक्षिण में भी जितने भी मंदिर हैं वहां भी गर्भगृह में लाइट नहीं लगाई जाती है।
विजय राघव राज मंदिर 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां गर्भगृह में लाइट नहीं जलती।
विभीषण कुंड मोहल्ले में स्थित विजय राघव राज मंदिर के महंत श्री धराचार्य जी महाराज बताते हैं कि विजय राघव राज महाराज का मंदिर 1904 में स्थापित हुआ था। तब से लगभग 100 साल से ज्यादा समय बीत गया, यहां लाइट गर्भगृह में नहीं लगी है।
उन्होंने बताया कि पहले पूरे मंदिर में लाइट की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन, धीरे-धीरे लाइट दैनिक जीवन का हिस्सा बन गई, इसलिए मंदिर के गर्भगृह को छोड़कर सब जगह अब लाइट है। हालांकि, हम लोग अभी भी बिजली वाले पम्प का पानी पीने के बजाय कुंए के पानी का इस्तेमाल करते है। राम जी के प्राकट्य उत्सव में भी उनका श्रृंगार अशोक की पत्तियों और फूलों से करते है न कि लाइट वाली झालर लगाते हैं।
विजय राघव राज मंदिर के महंत श्री धराचार्य जी महाराज के मुताबिक, पहले पूरे मंदिर में ही लाइट नहीं थी। लेकिन अब गर्भगृह को छोड़कर हर जगह लाइट लगी है।
महंत ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से मंदिर में अखंड रामनाम संकीर्तन चल रहा है। अम्मा जी के मंदिर के महंत श्री वेंकटाचार्य स्वामी कहते हैं कि हमारे राम हमेशा सीता, लक्ष्मण के साथ रथ पर सवार रहते हैं। यही वजह है कि मंदिर के सामने गरुण ध्वज बना रहता है। माना जाता है कि जिसे हनुमान जी संभाले रहते हैं।
दूसरा मंदिर: 420 साल बाद भी है इस मंदिर को औरंगजेब का खौफ, महीने में 2 बार ही खुलते हैं भक्तों के लिए मंदिर के कपाट
अयोध्या का उर्दू बाजार...कभी त्रेता नाथ मोहल्ला के नाम से प्रसिद्ध था। यहीं पर स्थित है त्रेता नाथ मंदिर..इस मंदिर की खासियत है कि इसके कपाट भक्तों के लिए महीने में सिर्फ 2 बार ही खुलते हैं। महीने में पड़ने वाली 2 एकादशी के दिन शाम को ही खुलता है।
सात पीढ़ी से मंदिर के पुजारी का काम देख रहे सुनील मिश्रा ने बताया कि मेरे पुरखों ने बताया कि यह मंदिर 500 साल से ज्यादा पुराना है। औरंगजेब के शासन काल में इसे तुड़वा दिया गया था। साथ ही मोहल्ले में तीन मस्जिदें भी तब बनवाई गई थीं। लगभग यह समय 1649 से 1707 के बीच का था। उस समय हमारे मोहल्ले का नाम भी त्रेता नाथ मोहल्ला था, लेकिन इसे उर्दू बाजार कर दिया गया।
ये तस्वीर त्रेता नाथ मंदिर के बाहर की है। ये करीब 500 साल पुराना मंदिर है। लेकिन इसे औरंगजेब ने तुड़वाकर मस्जिद बनवा दी थी।
उन्होंने बताया कि जब मंदिर दोबारा लगभग 150 साल पहले फिर बनाया गया तो भगवान को सुरक्षित रखने के लिए तमाम उपाय सुझाए गए। तब यह उपाय सुझाया गया कि यदि मंदिर में भीड़ नही होगी तो मंदिर को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन भक्तों के लिए इसे महीने की दो एकादशी के दिन खोला जाने लगा। मंदिर में भगवान की पूजा अर्चना नियमित रूप से समय-समय से हम और हमारा परिवार करता है। लेकिन भक्तों के लिए सिर्फ दो दिन ही खुलता है।
त्रेता नाथ मंदिर महीने में सिर्फ दो बार ही आम लोगों के लिए खुलता है और वो भी एकादशी के दिन।
उन्होंने बताया कि अब माहौल बदल गया है, लेकिन परंपरा का निर्वहन हम करते हैं। इसी पूजा-अर्चना से हमारे परिवार का खर्च भी चलता है। मंदिर भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में आ गया है। लेकिन, पैसों की कमी के चलते इसे सही नहीं करा पा रहे हैं।
तीसरा मंदिर: लक्ष्मण है अयोध्या के राजकुमार, लेकिन है इकलौता मंदिर
अयोध्या में सरयू तट पर लक्ष्मण घाट है। जिससे सटा हुआ लक्ष्मण का यहां इकलौता मंदिर है। जिसे लक्ष्मण किला के नाम से भी जाना जाता है। पूरे अयोध्या में मुख्य रूप से लक्ष्मण का यही मंदिर है। यहां लक्ष्मण की शेषावतार में पूजा होती है।
यहां लक्ष्मण को शेषावतार के रूप में पूजा जाता है।
मंदिर के महंत मैथिली रमण शरण बताते है कि रामायण में एक प्रसंग है, जिसमें श्रीराम भगवान से काल व्यक्ति के रूप में आकर मिलते हैं और उनसे प्राण त्यागने की बात करते हैं। काल ने भगवान राम के सामने शर्त रखी थी कि यदि कोई हमारी बातें सुनेगा तो उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। तब भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण को पहरेदारी के लिए लगाया।
वार्ता शुरू ही हुई थी कि ऋषि दुर्वासा श्रीराम से मिलने पहुंच गए। लक्ष्मण ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वह श्राप देने पर अड़ गए। इसके बाद लक्ष्मण भगवान को सूचना देने बीच वार्ता में पहुंच गए। जिसके बाद वह दंड के भागीदार खुद बन गए। उसके बाद लक्ष्मण ने सरयू घाट पर मानव देह त्याग कर शेषावतार का दर्शन कराया था। इस घाट को सहस्त्र धारा घाट भी बोला जाता है।
अयोध्या में स्थित लक्ष्मण जी का इकलौता मंदिर। इसे लक्ष्मण किला के नाम से भी जाना जाता है।
महंत ने बताया कि रीवा नरेश के दीवान ने 150 वर्ष पहले यह मंदिर बनवाया था। उन्होंने बताया कि महारानी विक्टोरिया ने रीवा नरेश को यह 52 बीघा जमीन दान में दी थी। यही नहीं रीवा नरेश ने मंदिर के खानपान यानी गल्ला पानी के लिए मध्य प्रदेश में 52 एकड़ जमीन दे रखी है।
उन्होंने बताया कि मेरे साथ यहां कई संत महात्मा रहते हैं। विद्यार्थी रहते हैं। सबके रहने-खाने की व्यवस्था मंदिर की ओर से ही होती है। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि इस मंदिर में यदि कोई झूठी कसम खाता है तो उसका अनिष्ट होना तय है। क्योंकि लक्ष्मण जी ने श्रीराम को दिए वचन की खातिर अपनी देह त्याग दी थी।